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प्रियंका गांधी ने संसदीय विवाद के बीच बयान का बचाव करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया

by admin477351

प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस की प्रमुख सांसद, ने हाल ही में संसद में दिए गए अपने बयान के विवाद के संदर्भ में कहा है कि उनकी टिप्पणियाँ पूरी तरह से तथ्यात्मक थीं और इन्हें असंसदीय नहीं कहा जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आलोचना या किसी कार्रवाई की संभावना के बावजूद, वह समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाना नहीं छोड़ेंगी।

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों का उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत हमला करना नहीं था। बल्कि वे महिलाओं के प्रति समाज की सोच और उससे जुड़े व्यापक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती थीं। उनके अनुसार, तथ्यों को सामने रखना लोकतांत्रिक बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे असंसदीय नहीं माना जाना चाहिए।

अपनी बात के समर्थन में, प्रियंका गांधी ने 2009 के मंगलुरु पब हमले के मामले का हवाला दिया, जिसमें कथित रूप से एक व्यक्ति के साथ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की तस्वीरें सामने आई थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि उस व्यक्ति को बाद में भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। इस विवाद की शुरुआत लोकसभा में तब हुई जब प्रियंका गांधी ने बिलकिस बानो मामले और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाया, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी और किरेन रिजिजू ने उनकी आलोचना की।

इस दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पेलेट गन के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से इस पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

इस सबके बीच, सार्वजनिक परीक्षाएं (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि केवल कड़ी सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है। थरूर ने प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत रोकथाम व्यवस्था, न्यायपालिका की क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति और नई अदालतों की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने प्रियंका गांधी के बयान को सार्वजनिक बहस का हिस्सा बताते हुए समर्थन किया।

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